मुंबई | दुनिया भर में मेमोरी चिप की भारी कमी ने स्मार्टफोन इंडस्ट्री को हिला दिया है. Apple के CEO Tim Cook ने हाल ही में साफ कह दिया है कि आने वाले iPhone, Mac और iPad की कीमतें बढ़ना अब लगभग तय है. इसकी सबसे बड़ी वजह है AI डेटा सेंटर की बढ़ती भूख, जिसने फोन में लगने वाली RAM और स्टोरेज को महंगा कर दिया है.
Tim Cook ने क्या कहा
Wall Street Journal को दिए इंटरव्यू में Tim Cook ने माना कि मेमोरी और स्टोरेज की ऊंची लागत की वजह से कीमतें बढ़ाना अब टाला नहीं जा सकता. उन्होंने मौजूदा हालात को “unsustainable” बताया और कहा कि कंपनी ग्राहकों पर पूरा बोझ डालने से बचने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब यह मुश्किल हो गया है.
Cook ने यह भी कहा कि Apple अपनी कैश रिज़र्व का इस्तेमाल मेमोरी सप्लाई बढ़ाने में करने को तैयार है. हालांकि कंपनी अपनी खुद की मेमोरी फैक्ट्री बनाने की योजना नहीं रखती. उनके शब्दों में, कंपनी वही करती है जिसमें वह अच्छी है.
iPhone 18 की कीमत कितनी बढ़ सकती है
रिपोर्ट्स के मुताबिक सितंबर 2026 में लॉन्च होने वाला iPhone 18 Pro सीरीज इस बढ़ोतरी की चपेट में आ सकता है.
- TechInsights के अनुमान के अनुसार, मुनाफा बरकरार रखते हुए बढ़ी हुई लागत को आगे बढ़ाने पर अगले iPhone 18 Pro की कीमत में करीब 270 डॉलर का इज़ाफा हो सकता है.
- कुछ अनुमानों के मुताबिक iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,399 डॉलर या उससे ज़्यादा हो सकती है, जो iPhone 17 Pro के मुकाबले 200 से 300 डॉलर की बढ़ोतरी है.
भारत के लिहाज़ से देखें तो पहले iPhone 18 Pro Max की कीमत लगभग 1,49,900 रुपये के आसपास रहने का अनुमान था. लेकिन Cook के बयान के बाद माना जा रहा है कि सितंबर 2026 की आखिरी कीमत इन शुरुआती अनुमानों से ऊपर जा सकती है.
एक बात ध्यान देने वाली है. कुछ विश्लेषक, जैसे Ming-Chi Kuo, यह भी मानते हैं कि Apple अमेरिकी बाज़ार में शुरुआती कीमत स्थिर रखने की कोशिश कर सकता है और लागत का बोझ खुद उठा सकता है. यानी हर बाज़ार में बढ़ोतरी एक जैसी नहीं होगी.
असली वजह: RAM नहीं, AI की डिमांड
स्मार्टफोन और AI सर्वर, दोनों में लगने वाली मेमोरी एक ही फैक्ट्री से बनती है. फर्क सिर्फ़ इतना है कि AI कंपनियां इसके लिए कहीं ज़्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक Samsung, SK Hynix और Micron जैसी बड़ी कंपनियों ने अपनी उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा High-Bandwidth Memory (HBM) की तरफ़ मोड़ दिया है, जो AI डेटा सेंटर में इस्तेमाल होती है. इसका सीधा असर आम फोन और कंप्यूटर में लगने वाली सामान्य RAM की सप्लाई पर पड़ा है.
आंकड़े इस संकट की गंभीरता दिखाते हैं.
- Counterpoint Research के मुताबिक मोबाइल DRAM की कीमतें 2025 की शुरुआत से अब तक करीब 70 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं.
- एक रिपोर्ट के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में DRAM की कीमतें पिछली तिमाही के मुकाबले 80 से 90 प्रतिशत तक उछल गईं.
सिर्फ़ Apple नहीं, हर कंपनी परेशान
यह संकट किसी एक ब्रांड तक सीमित नहीं है.
| असर | विवरण |
|---|---|
| औसत कीमत | Counterpoint के अनुमान के मुताबिक 2026 में स्मार्टफोन की औसत कीमत 6.9 प्रतिशत बढ़ सकती है |
| शिपमेंट | वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट 2026 में करीब 2.1 प्रतिशत गिर सकती है |
| बजट फोन | 200 डॉलर से कम कीमत वाले फोन की उत्पादन लागत 2025 की शुरुआत से 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ी |
| Samsung | Galaxy S26 और S26 Plus अपने पिछले मॉडल से 100 डॉलर महंगे लॉन्च हुए |
“Shrinkflation” का खेल: कम हार्डवेयर, वही कीमत
कीमत स्थिर दिखाने के लिए कई कंपनियां एक चालाकी अपना रही हैं. वे फोन की कीमत तो नहीं बढ़ातीं, लेकिन अंदर का हार्डवेयर घटा देती हैं.
इसका मतलब है कि अब उतने ही पैसे में आपको पहले से कम RAM और स्टोरेज मिल सकता है. जैसे पहले जहां 6GB RAM मिलती थी, वहां अब 4GB. और जहां 128GB स्टोरेज था, वहां 64GB. कीमत के टैग पर भले फर्क न दिखे, लेकिन हाथ में आने वाला फोन कमज़ोर हो जाता है.
भारतीय ग्राहकों पर क्या असर
भारत में Apple के प्रोडक्ट पहले से ही महंगे माने जाते हैं, क्योंकि इन पर GST और इम्पोर्ट ड्यूटी जुड़ती है. ऐसे में मेमोरी संकट इस कीमत को और ऊपर ले जा सकता है.
संदर्भ के लिए, भारत में iPhone 17 की शुरुआती कीमत 82,900 रुपये थी, जो iPhone 16 की 79,900 रुपये की शुरुआती कीमत से ज़्यादा थी. अगर अमेरिकी बाज़ार में कीमत स्थिर भी रहती है, तो ज़रूरी नहीं कि भारतीय ग्राहकों को भी वही राहत मिले.
यह संकट कब तक चलेगा
विश्लेषकों के मुताबिक यह कोई अस्थायी दिक्कत नहीं है. Micron और SK Hynix की नई फैक्ट्री क्षमता 2027 से पहले पूरी तरह चालू नहीं होगी. इसका मतलब है कि सप्लाई और मांग के बीच यह असंतुलन 2027 तक, और शायद उसके बाद भी, बना रह सकता है.
AI की रफ़्तार ने अब आपकी जेब तक दस्तक दे दी है. नया फोन खरीदने की सोच रहे लोगों के लिए संदेश साफ़ है. आने वाले महीनों में बजट फोन से लेकर फ्लैगशिप तक हर सेगमेंट में कीमतें ऊपर जा सकती हैं. ऐसे में अगर ज़रूरत है तो खरीदारी टालना भविष्य में महंगा पड़ सकता है.
नोट: इस लेख में दी गई कीमतें और आंकड़े विभिन्न बाज़ार विश्लेषण फर्मों (Counterpoint, TechInsights, IDC) की रिपोर्ट्स और उद्योग अनुमानों पर आधारित हैं. किसी भी कंपनी ने अभी तक नई कीमतों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. iPhone 18 की कीमत, लॉन्च तिथि और अन्य विवरण कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही पुष्टि किए जा सकते हैं. खरीदारी का कोई भी फैसला लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से कीमत की पुष्टि ज़रूर कर लें.







