नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर भारत में लगी रोक को बरकरार रखा है. NEET-UG री-एग्जाम से ठीक पहले लगी इस रोक को कोर्ट ने सही ठहराया और टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी. सरकार ने यह कदम क्यों उठाया कोर्ट ने क्या कहा और आम यूज़र पर इसका क्या असर पड़ेगा पढ़िए पूरी जानकारी.
क्या है पूरा मामला
केंद्र सरकार ने NEET-UG री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम तक पहुँच पर अस्थायी रोक लगा दी थी. सरकार का कहना था कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लीक हुए प्रश्नपत्र आंसर और परीक्षा से जुड़ी अनधिकृत सामग्री फैलाने में किया जा सकता है. यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी NTA और शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की सिफारिश पर उठाया गया.
करीब एक महीने पहले NEET परीक्षा के नतीजे रद्द कर दिए गए थे क्योंकि प्रश्नपत्र पहले से लीक होने के आरोप लगे थे. इसी पृष्ठभूमि में री-एग्जाम से पहले सरकार ने एहतियातन यह रोक लगाई.
रोक लागू होते ही कुछ ही घंटों में टेलीग्राम भारत में बंद हो गया. टेलीकॉम ऑपरेटरों ने ऐप तक पहुँच रोक दी और गूगल तथा एप्पल ने अपने ऐप स्टोर से टेलीग्राम हटा दिया.
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को टेलीग्राम की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने इस रोक को चुनौती दी थी. जस्टिस तेजस करिया ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत किसी प्लेटफॉर्म तक पहुँच रोकने का अधिकार रखती है.
दिल्ली हाईकोर्ट के अनुसार धारा 69A के तहत तय प्रक्रिया का पालन किया गया था. मौजूदा हालात में सरकार के पास इस अस्थायी रोक के पर्याप्त कारण थे.
कोर्ट ने यह भी कहा कि टेलीग्राम का तकनीकी ढाँचा चैनल ग्रुप बॉट क्लाउड-आधारित स्टोरेज और यूज़रनेम आधारित गुमनामी के ज़रिए तेज़ी से और बड़े पैमाने पर सामग्री फैलाने में सक्षम है. इसके मैसेज-एडिटिंग फीचर का दुरुपयोग कर यह झूठा दावा भी फैलाया जा सकता था कि परीक्षा से पहले पेपर लीक हो चुका है.
रोक कब तक रहेगी
कोर्ट के फैसले के अनुसार टेलीग्राम पर रोक 22 जून तक रहेगी, जबकि इसका मैसेज-एडिटिंग फीचर 30 जून तक बंद रहेगा. यह रोक NEET-UG री-एग्जाम के तुरंत बाद तक के लिए लगाई गई थी. री-एग्जाम 21 जून को होना तय है.
टेलीग्राम ने अपने बचाव में क्या कहा
टेलीग्राम ने कोर्ट में दलील दी कि उसने NEET से जुड़ी गैरकानूनी सामग्री रोकने के लिए कई कदम उठाए. कंपनी के मुताबिक उसने 900 से ज़्यादा लिंक हटाए और ऐसी सामग्री पहचानने तथा हटाने के लिए AI तथा मशीन लर्निंग टूल का इस्तेमाल किया.
कंपनी ने यह भी कहा कि उसने उन्नत AI और मानव-मॉडरेशन के मिले-जुले तरीके से सामग्री की समीक्षा की और अपनी मॉडरेशन प्रक्रिया लगातार बेहतर की. टेलीग्राम का कहना था कि उसकी सेवा शर्तें परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी के लिए प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर रोक लगाती हैं.
वहीं सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार के पास इस रोक के समर्थन में पर्याप्त सामग्री मौजूद है. सरकार ने प्लेटफॉर्म के तकनीकी ढाँचे खासकर बिना लगातार मानवीय नियंत्रण के बॉट और ऑटोमेटेड अकाउंट से बड़े पैमाने पर मैसेज फैलाने को लेकर चिंता जताई.
आम यूज़र पर असर
भारत टेलीग्राम का सबसे बड़ा बाज़ार है, जहाँ इसके 15 करोड़ से ज़्यादा यूज़र हैं. ऐसे में इस रोक का असर बड़ी संख्या में सामान्य उपयोगकर्ताओं पर पड़ा. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया था. क्या एक परीक्षा की वजह से करीब 15 करोड़ यूज़र के अधिकारों को सीमित करना उचित है.
टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव ने भी इस फैसले की आलोचना की और कहा कि इस रोक से आम यूज़र प्रभावित हो रहे हैं, जबकि परीक्षा से जुड़ी लीक सामग्री पहले ही दूसरी जगहों पर फैल चुकी थी.







