ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा कर दी है. ईरान का कहना है कि लेबनान में हुए घातक हमलों के बाद उसने यह कदम उठाया है और इसके लिए उसने अमेरिका तथा इजरायल पर हाल ही में हुए शांति समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है. यह घटनाक्रम उस समझौते के सिर्फ कुछ दिनों बाद सामने आया है. जिसे महीनों की लड़ाई के बाद युद्धविराम के लिए तय किया गया था.
क्या है पूरा मामला
लेबनान के बालबेक के पास अल-जेमालिया गांव में हुए इजरायली हमले के बाद वहां तलाशी और बचाव अभियान चल रहा है. ईरान का कहना है कि यह हमला उसी शांति समझौते का उल्लंघन है जिस पर हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनी थी. इसी के विरोध में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा बंद करने की घोषणा की है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक है.
यह घटनाक्रम तब हुआ जब एक दिन पहले ही इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच लड़ाई रोकने पर सहमति बनी थी, जिसे अमेरिका और अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने मध्यस्थता कर तय करवाया था. लेकिन सहमति के बावजूद हमले जारी रहने से अमेरिका-ईरान वार्ता की स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है.
पीछे की पृष्ठभूमि: कैसे बना था समझौता
मध्यस्थों ने 14 जून को एक समझौता ज्ञापन की घोषणा की थी. जिसका मकसद हस्ताक्षर के 60 दिनों के भीतर इस संघर्ष को औपचारिक रूप से खत्म करना था. इसके अगले ही दिन 15 जून को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर एक अस्थायी समझौता हुआ. जिसकी खबर से वैश्विक बाजारों में तेजी आई थी और तेल की कीमतें करीब 4 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई थीं.
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए. ट्रंप ने जी7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के वर्साय में हस्ताक्षर किए.
हालांकि यह समझौता शुरू से ही कमजोर साबित हो रहा है. इससे पहले 1 जून को भी ईरान ने लेबनान में इजरायल की कार्रवाई को युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए बातचीत को निलंबित कर दिया था.
अभी कूटनीतिक स्थिति क्या है
अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं. वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपनी स्विट्जरलैंड यात्रा फिलहाल टाल दी है. कल इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच लड़ाई रोकने पर सहमति बनी थी, लेकिन अमेरिका-ईरान वार्ता अब भी संतुलन की कगार पर बनी हुई है.
यह पूरा घटनाक्रम बेहद तेजी से बदल रहा है, और पिछले कुछ हफ्तों में युद्धविराम और उल्लंघन के दावों का सिलसिला कई बार दोहराया जा चुका है.







